अंतर्मन की संवेदना क्या खोया? क्या पाया जग म&# - Couverture souple

Pandey, Dr Rajnish Kumar

 
9781807150167: अंतर्मन की संवेदना क्या खोया? क्या पाया जग म&#

Synopsis

अंतर्मन पीडा़ ही अंतर्मन पुस्तक का आधार है। यह पुस्तक यथार्थ और सत्य के बीच अंतर को स्पष्ट करती है और समाज में व्याप्त विसंगतियों को उद्घाटित करती है। साथ ही अपील करती है कि हमें गलत को ग़लत कहने की सामर्थ्य रखनी चाहिए। लेखक ने समाजिक जीवन में रहते हुए जिन तकलीफों व विसंगतियों को महसूस किया है, वैसा ही इस पुस्तक में लिख दिया है। एक संवेदनशील मन जो भी महसूस करता है, उसके उद्गार इस पुस्तक में समाहित है। इस पुस्तक में लेखक की प्रमुख इक्यावन (51) कविताओं का यह संग्रह यथार्थवादी दृष्टिकोण रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

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À propos de l'auteur

डॉ रजनीश कुमार पाण्डेय ओजस्वी शिक्षक- केंद्रीय विद्यालय संगठन शिक्षा - M.Sc, M.Phil, Ph.D, B.Ed. NCERT परामर्शदाता (मनोदर्पण) भारत सरकार शिक्षा मंत्रालय। डॉ रजनीश, सहज और संवेदनशील व्यक्तित्व हैं। वह समाजिक और राष्ट्रीय कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। डॉ रजनीश पर्यावरण जीव विज्ञान विषय से डाक्टर आफ फिलासफी (Ph.D) हैं तथा विज्ञान शिक्षक हैं। वह विज्ञान विषय के साथ -साथ हिंदी विधा में संवेदनशील व यथार्थ परक कविताएं व लेख लिखते हैं तथा विंध्य क्षेत्र के सुप्रसिद्ध कवि, लेखक हैं। आपने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अनेक प्रयत्न किये हैं। डॉ रजनीश का मानना है कि हमारी कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए। यह अंतर उन्हें जहां भी जिस रूप में दिखता है, वह उसके विरुद्ध आवाज जरूर उठाते हैं।

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