Kitne Parde or Uthaun (कितने परदे और उठाऊँ) - Couverture souple

Agarwal, Dr. Giriraj Sharan

 
9788128831621: Kitne Parde or Uthaun (कितने परदे और उठाऊँ)

Synopsis

कब तक चलूँ फुदक-फुदक कर मैं भी उड़ना चाहती हूँ उन्मुक्त गगन में विचरण करना चाहती हूँ तुमने मुझे पंछी तो बनाया है मगर न पंख दिए न उड़ना सिखाया है जाने तेरे मन में ये क्या आया है। राह में काँटों का जाल भी बिछाया है। अब कैसे करूँ मैं इसे पार तू ही बता दे, ऐ मेरे रचनाकार !

Les informations fournies dans la section « Synopsis » peuvent faire référence à une autre édition de ce titre.