प्रस्तुत पुस्तक भारतीय समाजजीवन के विभिन्न आयामों का स्पर्श करते हुए लोक, भारतबोध, संस्कृति, शिक्षा, पत्रकारिता, कला, दर्शन, लोकतंत्र, लोकमत, राजनीति, परंपरा, धर्म, सभ्यता, संचार, संविधान, आदि अनेकानेक शाश्वत, सार्वकालिक एवं समकालीन विषयों एवं प्रश्नों को संबोधित करती है। साथ ही यह लोकजीवन तथा समाजजीवन के पारस्परिक एवं पारंपरिक तंतुओं को रेखांकित भी करती है और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उद्घाटित करती है। अपने समग्र रूप में यह पुस्तक भारतबोध का प्रामाणिक अभिलेख तथा लोकमंथन की अधिकृत प्रस्तुति है।
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