Wo 17 Din (वो 17 दिन) - Couverture rigide

Singh, Kumar Rajiv Ranjan

 
9789359645544: Wo 17 Din (वो 17 दिन)

Synopsis

इतिहास बन चुके किसी भी त्रासदी को रोचक तरीके से लिखना और उसमें हकीकत की तासीर को बनाएं रखना किसी भी लेखक के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। लेकिन यह चुनौती तब और बड़ी हो जाती है जब उसे हर वर्ग, हर तबके के पाठकों को ध्यान में रखकर लिखा गया हो । यह चुनौती भरा काम कुमार राजीव रंजन सिंह ने किया है। इसके लिए उनकी तारीफ की जानी चाहिए। कुमार राजीव रंजन सिंह की किताब "वो 17 दिन " को पढ़ते हुए कभी भी ऐसा नहीं लगता है कि हम किसी त्रासदी को पढ़ रहे हैं बल्कि ऐसा लगा जैसे हम उस घटना के साक्षी रहे हों और हर एक घटना हमारी आँखों के सामने डॉक्यूमेंट्री फिल्म के रूप में चल रही हो । उत्तराखंड के सिलक्यारा सुरंग में सत्रह दिनों तक फंसी रही जिंदगियों ने हर एक दिन मौत का तांडव होते देखा है। उनके आंखों के सामने कभी न खत्म होने वाला अंधेरा था, लेकिन इसके साथ ही उनके अंदर भरोसे की एक ऐसी अदृश्य रोशनी भी जगमगा रही थी जो उन्हें यह भरोसा दिला रही थी कि वह एक दिन अपनों से जरूर मिलेंगे।

Les informations fournies dans la section « Synopsis » peuvent faire référence à une autre édition de ce titre.