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Yadi Pyar Karo - Couverture souple

Taslima Nasreen

 
9789360861179: Yadi Pyar Karo

Synopsis

प्रेम। अकुंठ प्रेम। निर्बंध प्रेम। देह और आत्मा को आप्लावित करता प्रेम। शरीर के सर्वांग को कँपाता आग-सा जलता, बर्फ़-सा शीतल प्रेम। प्रेम जिसके चिह्न देर तक साथ रहते हैं, देह पर भी, मन पर भी, रूह के भीतर गहरे अँधेरे में भी। यादों में चहकता, उम्मीद और इन्तज़ार में छटपटाता प्रेम! प्रेम की इन कविताओं को तसलीमा नसरीन के अलावा भला कौन लिख सकता था। प्रेम के समूचे अनुभव को शब्द देने के लिए एक साहसी क़लम की ज़रूरत हर दौर में पड़ेगी, उनके पास वह क़लम है, वह साहस भी। उनके भीतर की प्रेमाकांक्षी स्त्री कहती है—‘यदि प्यार करो’ तो उसे कहो, और इस तरह कहो कि ‘चिड़ियाँ कहें, पेड़ के पत्ते, फूल बोलें, आकाश बोले, मेघ-वर्षा बोलें, धूप बोले, चन्द्रमा की रोशनी बोले, पड़ोसी बोलें, तालाब का घाट बोले, कि तुम मुझे प्यार करते हो।’ ‘यदि प्यार करो’ में संकलित तसलीमा नसरीन की इन कविताओं में वह सब कुछ है जिसका आविष्कार प्रेम ने अब तक किया है—बेशर्त समर्पण भी, अधिकार भी, ईर्ष्या भी, और हाँ, अपने होने का गहरा बोध भी, अपने अस्तित्व को अपनी हद में सम्पूर्ण बनाए रखने की ज़िद भी, क्योंकि अगर मैं ही नहीं हूँगी तो प्यार कौन करेगी, और तुम किससे प्यार करोगे? तसलीमा का प्यार न समाज के सामने शर्मिन्दा है, न उम्र के सामने अवश, न मानक-स्वीकृत रिश्तों की चहारदीवारी तक सीमित। यह सम्पूर्ण प्रेम है, जैसा उसे होना चाहिए।

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