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श्री माता वैष्णो देवी माँ की पुकार: प्रवास वृतांत (Shri Mata Vaishno Devi Maa Ki Pukar: Pravas Vritant) - Couverture rigide

K. V. Lakshmana Murthy

 
9789371007849: श्री माता वैष्णो देवी माँ की पुकार: प्रवास वृतांत (Shri Mata Vaishno Devi Maa Ki Pukar: Pravas Vritant)

Synopsis

यह एक यात्रा वृतांत का अंश हैं। जिसमें लेखक ने अपनी 'श्री माता वैष्णो देवी यात्रा' का वर्णन किया है। श्री माता वैष्णो देवी का दर्शन इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है, उसके साथ ही हर व्यक्ति को पृथ्वी पर जीवनयापन करते समय अपने जीवन को अधिक सफल और स्वस्थ जीवन के लिए अनेक दर्शनीय, धार्मिक, ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक स्थलों की यात्रा करना जरूरी है।

हमारी वर्तमान पीढ़ी के युवा अपनी उच्च शिक्षा या अन्य उद्देश्यों के लिए पूरी दुनिया घूमते हैं, लेकिन हमारे ही देश में स्थित कई तीर्थस्थलों के दर्शन नहीं करते है और उन तीर्थ स्थलों की जानकारी भी हमारे आधुनिक युवाओं के लिए दुर्लभ है, क्योंकि व्यक्ति का आज के इस व्यस्त जीवन में अपना और अपने परिवार के लिए समय निकालना मुश्किल है। लेकिन जीवन को सफल, तनाव रहित और आनंदी बनाना चाहते हो तो समय मिलते ही अपने परिवार, मित्रों के साथ या समूह के साथ यात्रा पर जाने से व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है, मन-मस्तिष्क प्रसन्न होता है, थकान और कुछ दुख-दर्द भी कम हो जाते हैं।

लेखक ने स्वयं वन विभाग के अधिकारी के रूप में कार्य करने के कारण विस्तृत भूमि देखी है; विशाल समुद्र देखा है। वनस्पति संपदा की सुंदरता का अनुभव किया है। पशु जगत में भी प्रवेश किया है। कला, साहित्य, संस्कृति, संगीत की विविधताओं का अच्छी तरह से अनुभव किया है। यह कृति इसका प्रमाण है। व्यक्ति के स्वच्छ मन से किसी यात्रा पर जाने का निश्चय करने पर ईश्वर भी आपके इस कार्य को सफल बनाने के लिए आपके साथ खड़े रहते हैं। श्री माता वैष्णो देवी की यात्रा का वर्णन बहुत ही सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास है। इसे पढ़ते समय ऐसा लगता है कि हम स्वयं यात्रा पर गए थे और वापस आ गए। विवरणों की समृद्धि, स्थानीय पुराणों की विभिन्न प्रकार के पौराणिक कथाएँ और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यात्रियों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए इसका उल्लेख किया है।

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À propos de l'auteur

बेंगलुरु के मूल निवासी । कृषि में स्नातकोत्तर डिग्री धारक। 1985 ई. में केंद्रीय लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारी। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों में वरिष्ठ वन संरक्षक के रूप में सेवा। भारतीय प्रतिनियुक्ति पर कोयम्बटूर, बेंगलुरु, कोलकाता, नागपुर सहित विभिन्न संस्थानों में सेवा की। विश्व बैंक वन परियोजना के परियोजना नेता और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के समन्वयक के रूप में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया। उत्तर प्रदेश में मुख्य वन संरक्षक/निदेशक के रूप में सेवा करने के बाद सेवानिवृत्त हुए।

छात्र जीवन से ही देश और भाषा के प्रति गहरी रुचि रखने वाले उन्होंने कन्नड़ युवा संघ के सचिव, बेंगलुरु कृषि कॉलेज कन्नड़ संघ के अध्यक्ष के रूप में सेवा की और राष्ट्रीय केडेट कोर (एनसीसी), राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) संगठनों में भी सक्रिय रहे। कॉलेज के दिनों में एक खिलाड़ी के रूप में भी उन्होंने ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय युवा परिषद के सचिव और युवा किसान संघ के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।

विभिन्न पत्रिकाओं में उनके कई लेख और कविताएँ प्रकाशित हुई हैं। उन्होंने समूह गायन और कन्नड़ और हिंदी नाटकों में भी भाग लिया है। उत्तर प्रदेश आकाशवाणी केंद्र में उनके समूह गायन का प्रसारण किया गया है। एक शौकिया फोटोग्राफर के रूप में, उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की फोटोग्राफी प्रतियोगिता में एक पुरस्कार भी जीता है। उनकी अद्वितीय पर्यावरण चेतना और वन विभाग में सेवा के लिए, उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत सरकार को 'इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र' राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए सिफारिश की थी।

वर्तमान में बेंगलुरु में सेवानिवृत्त जीवन व्यतीत कर रहे हैं, वे कई साहित्यिक संघों और संस्थानों में सक्रिय हैं और साहित्य के क्षेत्र में भी शामिल हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए हैं। हाल ही में कर्नाटक तुलु साहित्य अकादमी, कुड्डा, कन्नड़ और संस्कृति विभाग, कथा बिंदु प्रकाशन, मंगलुरु, कल्कुरा प्रतिष्ठान के सहयोग से 'सौरभ रत्न राज्य पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है।

उन्होंने पहले ही 'पर्यावरण कहावतें' और 'इन्वाइरंमेटल प्रोवर्ट्स' (अंग्रेजी) नामक दो पुस्तकों का संपादन किया है। वर्तमान में, श्री माता वैष्णो देवी क्षेत्र की यात्रा वृत्तांत के माध्यम से उन्होंने कन्नड़ साहित्य जगत में भी अपनी पहचान बनाई है।

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