9789372137781: काँच के पुल

Synopsis

"काँच के पुल" एक संग्रह है-नाज़ुक, पारदर्शी, और सच के आसपास भटकता हुआ। इन कविताओं में जहाँ एक ओर आत्ममंथन है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक विसंगतियों की गूंज भी है। कभी ये कविताएँ ख़ालीपन की तहों में उतरती हैं, तो कभी पुराने दोस्तों की मुस्कान लिए लौट आती हैं। ये कविता-संग्रह उस अदृश्य पुल की तरह है जो हमें इस व्यस्त और भटकी हुई दुनिया में थोड़ी देर के लिए ठहरा देता है। यह किताब उन पाठकों के लिए है-जो अपने भीतर के संवादों को सुनना चाहते हैं,जो शब्दों से बनी खामोश राहों पर चलना जानते हैं।

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À propos de l'auteur

सौरभ कुमार गौतम समकालीन हिंदी लेखन के उन स्वरों में शामिल होने के आकांक्षी हैं जो संवेदनाओं को सादगी और गहराई के साथ व्यक्त करते हैं। आपका लेखन आत्मनिरीक्षण, स्मृति, और मानवीय संबंधों की महीन परतों को छूता है। पहली कविता-संग्रह "गुस्ताख़ी" के बाद "काँच के पुल" उनकी रचनात्मक यात्रा का अगला ठहराव है। वे मानते हैं कि कविता केवल कहने का माध्यम नहीं, सुनने और समझने की प्रक्रिया भी है।

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