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O mere pita - Couverture souple

Jamda, Karu Lal

 
9789388365390: O mere pita

Synopsis

तेजी से उभरते कवियों में कारुलाल जमड़ा की विशिष्ट पहचान यह है कि उनकी कविताएँ घर में उगाई गई हैं और उन्हें सींचने वाले असंख्य मित्रों को मैंने हमेंशा ही कविताओं के आस पास घेरा बना कर खड़ा हुआ देखा है । इस हिसाब से ये सबकी सब कविताएँ कवि जमड़ा जी की ही नहीं हैं, ये कविताएँ मित्रों के साथ -साथ माँ, बहन, पिता, बेटियों, गली-मोहल्ले के लोगों और निकट के रिश्तेदारों की बपौती या उससे भी कुछ ज्यादा लगती हैं । मैं कविता को अमूर्त नहीं मानता । कवि उसे अपनी आँखों से देखता है और आप यदि कवि के साथ खड़े हैं तो आप भी उसे खुली आँखों से देख सकते हैं । कवि जमड़ा जी के साथ खास यह है कि वे कविता को देखते समय अपनी माँ और पिता को बराबरी से शामिल करते हैं । कवि का घर ही जब कविता का प्रसूतिगृह भी हो, तब सहज ही कविता की किलकारियों से गूँजता हुआ घर का आकाश प्रेम के सुवर्ण-रेशों से जगमगाता हुआ हमारा ध्यान आकर्षित करने लगता है ।

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