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Mazaak - Couverture souple

Kumar, Ambuj

 
9789393267467: Mazaak

Synopsis

'ख्]़यात कवि, कहानीकार, निबंधकार कुमार अम्बुज का 'इच्]छाएँ' के बाद यह दूसरा कथा-संग्रह 'मज़ाक़' उनकी अप्रतिम गद्य शैली को कुछ और गहराई देता है, अधिक व्]यंजक बनाता है। जीवन की मूर्त-अमूर्त तकलीफ़ों को दृश्यमान करती ये कहानियाँ समाज में समानांतर रूप से हो रहे सांस्कृतिक, नैतिक ह्रास को भी लक्षित करती हैं। ये गहरे जीवनानुभवों, सूक्ष्]म निरीक्षणों, भाषा की विलक्षणता, कहन और शिल्]प के नये आविष्]कार से मुमकिन हुई हैं। अम्बुज अपने लेखन में संघर्षशील मनुष्य की वैचारिक और सामाजिक लड़ाई को रेखांकित करते रहे हैं। आज के क्रूर सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में पैरों तले की जिस ज़मीन को लगातार हमसे छीना जा रहा है, उसे फिर से पा लेने की शाश्वत आकांक्षा अम्बुज की इन कहानियों का अनुपेक्षणीय स्वर है। ये कहानियाँ चारों तरफ़ से घिरे मनुष्]य के संकटों, उसकी रोज़मर्रा की दारुण सच्]चाइयों को पठनीय रूपकों, अनोखे मुहावरों में रखते हुए जिजीविषा के सर्वथा नये रूपों से हमारा परिचय कराती हैं। आज संसार में निजी एकांत तलाशने, धरना देने हेतु जगह माँगने या जीवन में खोया विश्वास जगाने, संबंधों में प्रेमिल चाह या कोई सहज मानवीय इच्]छा भी किस कदर दुष्]कर, प्रहसनमूलक और अव्यावहारिक हो चली है, इस विडंबना को कहानी संग्रह 'मज़ाक' से सहज ही समझा जा सकता है।''

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