दुर्गा का मंदिर: देवदासी ... आरती - Couverture souple

Singh, Ayush Kumar

 
9798231075560: दुर्गा का मंदिर: देवदासी ... आरती

Synopsis

देवदासी प्रथा भारत की पुरानी और जटिल सामाजिक कुरीतियों में से एक है। पहले ये प्रथा मंदिरों से जुड़ी हुई एक पवित्र सेवा मानी जाती थी, जिसमें लड़कियां देवी-देवताओं की सेवा करती थीं और अपनी पूरी जिंदगी उनकी भक्ति में बिताती थीं। देवदासी लड़कियों को समाज में एक खास सम्मान भी मिलता था क्योंकि उन्हें देवी की प्रतिमा के साथ जोड़ा जाता था।

लेकिन समय के साथ-साथ ये प्रथा विकृत होकर कई जगह वेश्यावृत्ति का माध्यम बन गई। कई पुजारी और मंदिर प्रबंधक अपनी लालच और सत्ता के लिए इन लड़कियों को धोखे में डालते हैं। वे लड़कियों को मंदिर की सेवा के नाम पर बंदी बनाकर उनका शोषण करते हैं। इन लड़कियों को उनके परिवार की मर्जी के बिना चुना जाता है और उनकी आज़ादी छीन ली जाती है। यहां तक कि कई माता-पिता अपनी इच्छा से भी बेटी दान देते है।

पुजारी समाज में बहुत प्रभावशाली होते हैं। वे न सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान संचालित करते हैं, बल्कि इस कुरीति को कायम रखने में भी उनका अहम योगदान होता है। मंदिरों के पास रहने वाली लड़कियां, जिन्हें देवदासी कहा जाता है, अक्सर इस जाल में फंस जाती हैं जहाँ उनका जीवन संघर्ष, अपमान और सामाजिक बहिष्कार के बीच गुजरता है।

यह कहानी इसी काले सच को उजागर करती है कि कैसे धार्मिक आड़ में एक निर्दोष लड़की की जिंदगी तबाह हो जाती है। "दुर्गा का मंदिर देवदासी की अधूरी आरती" एक ऐसी कहानी है जो समाज की इस कुप्रथा के खिलाफ आवाज़ उठाती है और दिखाती है कि कैसे लड़कियां अपने अधिकारों के लिए लड़ सकती हैं।

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