Articles liés à अंतर्मन क&#x...

अंतर्मन की त्रासदी: मैं या हम - Couverture souple

रवि अहिरवार

 
9798895197684: अंतर्मन की त्रासदी: मैं या हम

Synopsis

जल्दबाज़ी करने से बहुत सारी चीजें छूट जाती है। जीवन में धैर्य बनाए रखना बहुत जरूरी हो जाता है तब, जब कोई काम धीमी गति की मांग कर रहा हो। ये किताब भी धैर्य से पढ़ने की मांग करती है। अगर तेज़ गति से आगे बढ़ेंगे तो शायद मस्तिष्क में कुछ न जाए और कुछ चला भी जाए तो वैसा न जाए जैसा लेखक प्रस्तुत करना चाहता है।इस पुस्तक में हर कविता और हर गद्य स्वयं में स्वतंत्र है। इनका किसी भी रचना से आपस में कोई संबंध नहीं। इसकी प्रत्येक रचना का स्वरूप एक दार्शनिक व मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण लिये है। किसी में प्रेम के आवरण पर चर्चा की है तो किसी पर सामाजिक जगत के नियमों पर, किसी पर मानसिक तनाव की बात की है तो किसी पर बाहरी जगत पर। अंतर्मन व अंतर्द्वंद्व के प्रश्न भी काफी मात्रा में है। ऐसे ही कुछ विषय का संकलन यह पुस्तक आपके समक्ष प्रस्तुत है।

Les informations fournies dans la section « Synopsis » peuvent faire référence à une autre édition de ce titre.