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9798896734925: पाषाण

Synopsis

अरावली की प्राचीन पर्वतमाला के मौन चट्टानों की ज़ुबानी सुनिए समय की अद्भुत कहानियाँ। “पाषाण” केवल एक कविता नहीं, बल्कि एक ऐसा दर्पण है जो इन स्थिर और अचल पत्थरों के माध्यम से जीवन की गहराइयों को प्रकट करता है। बार बार चट्टानें कहती हैं: “हम देख नहीं सकते, हम सुन नहीं सकते, हम बोल नहीं सकते।” फिर भी, उनकी निस्तब्धता में छुपा है समय की परतों का बोझ, प्रकृति के बदलते रंगों का चित्रण, और जीवन के अनकहे पहलुओं का प्रतिबिंब। सुभाष चंद्र जेतली की यह कृति आपको अरावली की गोद में ले जाएगी, जहां पत्थरों की मूक अनुभूतियाँ प्रकृति और मानवता के बीच पुल बनाती हैं। यह पुस्तक आपको सोचने पर मजबूर करेगी—क्या स्थिरता में भी जीवन की धड़कन होती है?   पढ़ें और पत्थरों के मौन को सुनें।

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