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इलाहाबादी इंक़लाब: धूल, धरना और दिल्ली: Dhool, Dharna aur Delhi - Couverture souple

हरिओम तिवारी

 
9798902691891: इलाहाबादी इंक़लाब: धूल, धरना और दिल्ली: Dhool, Dharna aur Delhi

Synopsis

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की वो ऐतिहासिक लाल ईंटें, सलोरी की तंग गलियाँ और छात्र राजनीति का जुनून—यही है 'इलाहाबादी इंक़लाब' की रूह। यह कहानी है माधव त्रिपाठी की, जो एक अजीब दोराहे पर खड़ा है। एक तरफ बाबूजी की बरसों पुरानी चाहत है कि उनका बेटा 'कलेक्टर' बनकर घर लौटे, और दूसरी तरफ माधव के भीतर उबलता राजनीति का वो इंक़लाब है जो व्यवस्था को बदलना चाहता है। क्या संगम का पानी सिर्फ पाप धोता है, या एक आम लड़के के भीतर के कलेक्टर को भी जगाता है? क्या माधव अपने बाबूजी के सपनों की बलि चढ़ा देगा, या राजनीति की बिसात पर खुद को कुर्बान कर देगा? धूल, धरना और संघर्ष के बीच बुनी गई यह कहानी हर उस छात्र की है जो अपनी सादगी और महत्वाकांक्षा के बीच हर रोज लड़ता है। हरिओम तिवारी की यह कृति छात्र जीवन के यथार्थ, अटूट दोस्ती और उस मानसिक युद्ध को बयां करती है जो सलोरी के तख्त से शुरू होकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक जाता है।

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