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बिंबल द्वीप - Couverture souple

सुशील चंद्र

 
9798903927678: बिंबल द्वीप

Synopsis

"युद्ध क्या होता है और क्यों होता है? क्यों यह न केवल गणपतियों, सेनानायकों और सम्राटों की उत्कट रक्त- पिपासा को शांत करता है बल्कि उन लोगों की सहज मानवीयता का भी हरण कर लेता है जो स्वयं अपने अगले दिन के भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं? मुझे तो लगता है, हम सबके जीवन में जो भी और जितना भी विष है, युद्ध उसका सामूहिक और अंतिम परिणाम है।" एक भिक्षुणी ने कहा।"हाँ बहन, मैं बिलकुल सहमत हूँ आपसे। और विडंबना तो देखें। बिंबल द्वीप और रक्ष द्वीप के बीच जो युद्ध हुआ, उसका मूल्य किसको चुकाना पड़ा? जिन दोनों की महत्वाकांक्षाओं के कारण यह युद्ध हुआ वे दोनों तो लाभान्वित ही हुए और दोनों का विजयोत्सव इतने वर्षों बाद भी चल ही रहा है। गणपति दृश्यमित्र सम्राट बन गए, सेनापति नटेश्वरन् रक्ष द्वीप के सर्वोच्च और सर्वकालिक नायक बन गए, और रक्ष द्वीप का सिंहासन उनकी चरण पादुका। रक्त किसका बहा? "यह उपन्यास 300 ईसा पूर्व जंबूद्वीप के दक्षिण में स्थित एक काल्पनिक द्वीप समूह में घटी एक काल्पनिक परंतु लोमहर्षक कथा है जो काल्पनिक तो है लेकिन आज की दुनिया के सत्ता संघर्षों को न केवल परत दर परत उधेड़ती है बल्कि उन चश्मों को भी विश्लेषित करती है जिनसे दुनिया की सत्ताएँ दुनिया को देखती हैं, समाज को देखती हैं और विचारों को देखती हैं। और इसी यात्रा में हमारी मुलाक़ात होती हैं लहूलुहान मानवीय मूल्यों से जिन्हें हर युग में इन संघर्षों का मूल्य चुकाना पड़ता है ।

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