सिंगल स्क्रीन से मल्टीप्लेक्स (हिंदी सिनेमा का सफर) - Couverture souple

Rajesh Kumar Sinha

 
9798904519650: सिंगल स्क्रीन से मल्टीप्लेक्स (हिंदी सिनेमा का सफर)

Synopsis

'सिंगल स्क्रीन से मल्टीप्लेक्स : हिंदी फिल्मों का सफर' हिंदी सिनेमा के बदलते दौर, उसके सामाजिक प्रभाव और फिल्मी दुनिया की महत्वपूर्ण हस्तियों पर केंद्रित एक अत्यंत रोचक और संग्रहणीय पुस्तक है। यह केवल फिल्मों का विवरण नहीं, बल्कि भारतीय समाज, संस्कृति और दर्शकों की बदलती मानसिकता का भी जीवंत दस्तावेज़ है।इस पुस्तक में लेखक ने हिंदी फिल्मों के उस लंबे सफर को संवेदनात्मक और विश्लेषणात्मक दृष्टि से प्रस्तुत किया है, जहाँ कभी सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की सीटी-तालियों वाली संस्कृति थी और आज मल्टीप्लेक्स के आधुनिक, वर्गीय और तकनीकी दौर ने उसकी जगह ले ली है। पुस्तक में फिल्मों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर लेकिन सहज शैली में विचार किया गया है, जिससे यह सिर्फ फिल्म प्रेमियों के लिए ही नहीं बल्कि शोधार्थियों, मीडिया विद्यार्थियों और साहित्य पाठकों के लिए भी उपयोगी बन जाती है।पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें हिंदी सिनेमा की बड़ी शख्सियतों यथा अभिनेताओं, निर्देशकों, गीतकारों, संगीतकारों और तकनीकी पक्ष से जुड़े लोगों पर लिखे गए आलेख पाठकों को फिल्म जगत की अंदरूनी दुनिया से परिचित कराते हैं। लेखक ने फिल्मों को केवल मनोरंजन के रूप में नहीं देखा, बल्कि उन्हें समाज, संवेदना, बाजारवाद, तकनीकी बदलाव और सांस्कृतिक परिवर्तन के संदर्भ में भी परखा है।भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और पत्रकारिता शैली की है, जिससे पाठक शुरू से अंत तक जुड़ा रहता है। यह पुस्तक हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम अतीत और बदलते वर्तमान के बीच एक सार्थक सेतु का काम करती है। कुल मिलाकर, 'सिंगल स्क्रीन से मल्टीप्लेक्स : हिंदी फिल्मों का सफर' हिंदी फिल्म पत्रकारिता और फिल्म अध्ययन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण और पठनीय कृति है।

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