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आग के फूल: वीरता की आग और कविता की कोमलता - Couverture souple

भास्कर सिंह बादल

 
9798904794439: आग के फूल: वीरता की आग और कविता की कोमलता

Synopsis

"यह महज़ शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि अन्याय और रूढ़ियों के ख़िलाफ़ एक गर्जना है।"यह काव्य संग्रह उन सोई हुई चेतनाओं और शांत दिलों के लिए एक शंखनाद है, जो बदलाव की राह देख रहे हैं। लेखक ने यहाँ अपनी कलम को सिर्फ स्याही में नहीं, बल्कि साहस, स्वाभिमान और क्रांति के अंगारों में डुबोकर इन कविताओं को जन्म दिया है। यह किताब उन लोगों के जज़्बातों का जीवंत दस्तावेज़ है, जो न तो झुकना जानते हैं और न ही रुकना।इस संग्रह का मुख्य आधार इसका ओजस्वी रूप और तीखा रौद्र रस है। इसमें समाज में व्याप्त कुरीतियों, अन्याय और खोखली व्यवस्था के ख़िलाफ़ एक तीखा आक्रोश है। हर एक कविता पाठक की रगों में दौड़ते ख़ून की रफ़्तार को बढ़ा देने का माद्दा रखती है। जहाँ एक तरफ इसमें इतिहास के नायकों का शौर्य और पराक्रम है, वहीं दूसरी तरफ आम इंसान के भीतर छिपे उस आत्मसम्मान को जगाने की पुरज़ोर कोशिश है, जो वक्त की धूल के नीचे कहीं दब गया था।लेखक की भाषा बेहद धारदार, ओफनती और प्रभावशाली है। हर एक पंक्ति एक ऐसी हुंकार है जो पाठक के भीतर छाए निराशा के अंधेरे को चीरकर रख देती है। यह संग्रह सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं लिखा गया है, बल्कि यह आपके भीतर एक नया हौसला, एक नया जोश और कुछ कर गुज़रने की तड़प पैदा करने के लिए है। यह किताब किसके लिए है?:यदि आप वीर रस, ओजस्वी रचनाओं और क्रांतिकारी विचारों से लगाव रखते हैं; यदि आपको ऐसी शायरी और कविताएँ पसंद हैं जो रीढ़ की हड्डी में सिहरन पैदा कर दें और आपके स्वाभिमान को जगा दें, तो यह काव्य संग्रह सिर्फ और सिर्फ आपके लिए है।अपने भीतर की सोई हुई ऊर्जा और शौर्य को जगाने के लिए आज ही अपनी प्रति ऑर्डर करें और इस वैचारिक क्रांति का हिस्सा बनें!

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