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स्वयं से साक्षात्कार: 真真真真真� - 真真真 ,真真真真 真 真� 真真� 真真真真真 真真真� 真 真真 真� - Couverture rigide

राम चंद्र झा

 
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Synopsis

जीवन - सूत्र:प्रेरक प्रसंग

स्वयं से साक्षात्कार:

'मैं कौन हूँ?'-इस आदिम प्रश्न का उत्तर खोजने की यात्रा ही जीवन की सार्थकता है। बृहदारण्यक उपनिषद् के पावन आलोक में रचित यह पुस्तक, वैदिक काल के उन महान दार्शनिक संवादों का पुनर्जीवन है, जिन्होंने मानव चेतना को नई दिशा दी।इस पुस्तक में आप महर्षि याज्ञवल्क्य के उस दिव्य दर्शन को अनुभव करेंगे, जहाँ गार्गी की जिज्ञासाएँ सीमाओं को चुनौती देती हैं और मैत्रेयी का प्रश्न सीधे 'अमृतत्व' के रहस्य को उद्घाटित करता है। साथ ही, राजा जनक के साथ याज्ञवल्क्य के वे गूढ़ संवाद समाहित हैं, जो 'देह से विदेह' होने की उस चरम अवस्था को स्पष्ट करते हैं, जहाँ मनुष्य स्वयं से साक्षात्कार कर पूर्णता को प्राप्त करता है।
यह पुस्तक केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शिका है-जो प्राचीन ऋषियों के ज्ञान को आज के युग की उलझनों के समाधान के रूप में प्रस्तुत करती है। आत्म-स्वरूप को जानने की इस यात्रा में शामिल होने के लिए यह एक अनिवार्य कृति है।

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