Biru: Itihas ke Sath Vichar Yatra (Edition1st). Cet article n’est pas disponible.
Langue : hindi
Edité par Diamond Pocket Books Pvt Ltd, 2025
- Livre broché
- Neuf

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Etat: Neuf
EUR 23,44
A propos de cet article
New Book. Shipped from UK. Established seller since 2000.
N° de réf. du vendeur L2-9789369391875
- Titre
- Biru: Itihas ke Sath Vichar Yatra (Edition1st)
- Auteur
- Shekhar, Dr Virendra Kumar
- Éditeur
- Diamond Pocket Books Pvt Ltd
- Année de publication
- 2025
- État de l'article
- New
- Reliure
- PAP
- Langue
- hindi
- ISBN à 10 chiffres
- 9369391878
- ISBN à 13 chiffres
- 9789369391875
- Poids de l'article
- 299 grammes
बीसवीं शताब्दी के अंतिम चतुर्थांश से लेकर इक्कीसवीं सदी के प्रारम्भ के वर्षों की कालावधि में भारत में जो हुआ वो इससे पहले कभी नहीं हुआ था। इतिहास का पहिया इस समय अवधि में जितनी तेजी से घूमा उतनी तेजी से इससे पहले कभी नहीं घूमा था। इस तेजी से बदलते हुए इतिहास के एक साक्षी और कर्मयोगी के माध्यम से इस परिवर्तन की दिशा, दशा और इंसानी दायित्व को समझने का प्रयास मैंने अपनी रचना बिरू - इतिहास के साथ विचार-यात्रा' में करने का प्रयास किया है।
उपर्युक्त सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में भारत के विकास की पृष्ठभूमि में उपन्यास के नायक बिरू की विचार-यात्रा और उसके परिणाम स्वरूप हुई विकास-यात्रा सुधी पाठकगण के सम्मुख है।
उदहारण के लिए इसी पुस्तक से "मानव-जीवन में वास्तविक विकास और सच्चा सुख तभी संभव है जब अज्ञानता का उन्मूलन हो, स्वतंत्र चिंतन को प्रोत्साहन मिले और स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के साथ लोकतांत्रिक आदर्शों का पालन हो।"
उपर्युक्त सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में भारत के विकास की पृष्ठभूमि में उपन्यास के नायक बिरू की विचार-यात्रा और उसके परिणाम स्वरूप हुई विकास-यात्रा सुधी पाठकगण के सम्मुख है।
उदहारण के लिए इसी पुस्तक से "मानव-जीवन में वास्तविक विकास और सच्चा सुख तभी संभव है जब अज्ञानता का उन्मूलन हो, स्वतंत्र चिंतन को प्रोत्साहन मिले और स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के साथ लोकतांत्रिक आदर्शों का पालन हो।"
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